शहर के भीड़‑भाड़ वाले किनारे पर एक छोटा सा मकान था, जहाँ रहता था साजन। साजन का घर बहुत साधारण था—एक पुरानी ईंट‑की दीवार, दो झरोखों की खिड़कियाँ, और एक लटकी हुई सी धूप की छत। फिर भी इस घर में एक खास बात थी—यहाँ हर शाम की धुनें, हर सुबह का गीत गूँजता था।